सर्वार्थसाधक भगवन्नाम
इस प्रबल कलिकालमें जीवोंके कल्याणके लिये भगवान्का नाम ही एकमात्र अवलम्बन है—
नहिं कलि करम न भगति बिबेकू।
राम नाम अवलंबन एकू॥
—पर मनुष्यका जीवन आज इतना व्यस्त हो चला है कि वह कहता है कि ‘मुझे अवकाश ही नहीं मिलता। मैं भगवान्का नाम कब तथा कैसे लूँ।’ यद्यपि यह सत्य नहीं है। मनुष्यके लिये काम—सच्चा काम उतना नहीं है, जितना वह व्यर्थके कार्योंको अपना कर्तव्य मानकर जीवनका अमूल्य समय नष्ट करता है और अपनेको सदा काममें लगा पाता है। वह यदि व्यर्थके कार्योंको छोड़कर उतना समय भगवान्के स्मरणमें लगावे तो उसके पास भजनके लिये पर्याप्त समय है। पर ऐसा होना बहुत कठिन हो गया है। ऐसी अवस्थामें यदि जीभके द्वारा नाम-जपका अभ्यास कर लिया जाय तो जितनी देर जीभ बोलनेमें लगी रहती है, उसके सिवा प्राय: सब समय—सारे अंगोंसे सब काम करते हुए ही नाम-जप हो सकता है। जीभ नाममें लगी रहती है और काम होता रहता है। न काम रुकता है, न घरवाले नाराज होते हैं। वाद-विवाद तथा व्यर्थ बोलना बंद हो जानेसे मनुष्यकी वाणी पवित्र और बलवान् हो जाती है, झूठ-निन्दासे मनुष्य सहज ही बच जाता है, वाणीके अनर्गल उच्चारणसे होनेवाले बहुत-से दोषोंसे वह सहज ही छूट जाता है। नाम-जपसे पापोंका निश्चित नाश, अन्त:करणकी शुद्धि होती है, उसकी तो सीमा ही नहीं है। इसलिये ऐसा नियम कर लेना चाहिये कि सुबह उठनेके समयसे लेकर रातको सोनेके समयतक जितनी देर आवश्यक कार्यसे बोलना पड़ेगा, उसे छोड़कर शेष सब समय जीभके द्वारा भगवान्का नाम जपता रहूँगा। अभ्याससे जितना ही यह नियम सिद्ध होगा, उतना ही अधिक भगवान्की कृपासे मानव-जीवन परम और चरम सफलताके समीप पहुँचेगा।
भगवान्के नाममें कोई नियम नहीं है। सभी जातिके, सभी वर्गके, सभी नर-नारी, बालक-वृद्ध सभी समय, सभी अवस्थाओंमें, भगवान्का नाम जीभसे जप सकते हैं, मनसे स्मरण कर सकते हैं। भगवान्का नाम वही, जो जिसको प्रिय लगे—राम, कृष्ण, हरि, गोविन्द, शिव, महादेव, हर, दुर्गा, नारायण, विष्णु, माधव, मधुसूदन आदि कोई भी नाम हो। भगवान्का नाम ले रहा हूँ, इस भावसे जपना चाहिये।
१. जिनको समय कम मिलता हो—बोलना अधिक पड़ता हो—ऐसे लोग, जैसे वकील, अध्यापक, दुकानदार आदि—वे घरसे कचहरी, विद्यालय और दूकानपर जाते-आते समय रास्तेमें भगवान्का नाम लेते चलें और हो सके तो मनमें स्मरण करते चलें।
२. विद्यार्थी स्कूल-कॉलेज जाते-आते समय भगवान्का नाम लें।
३. किसान हल जोतते, बीज बोते, निनार करते, पौधा लगाते, पानी सींचते, खाद देते, खेती काटते आदि समय भगवान्का नाम जपें।
४. मजदूर हाथोंसे हर प्रकारका काम करते रहें और नाम जपते रहें। घरसे कामके स्थानपर जाते-आते समय नाम-जप करें।
५. उच्च अधिकारी, मिनिस्टर, सेक्रेटरी, जज, मुन्सिफ, जिलाधीश, परगनाधिकारी, डिप्टी कलक्टर, पुलिस-अफसर, रेलवे-अफसर तथा कर्मचारी, डाक-तारके कार्यकर्ता, तहसीलदार, कानूनगो, पटवारी, इंजीनियर, ओवरसियर, जिलापरिषद् तथा म्युनिसपलिटीके अधिकारी और कर्मचारी—बैंकोंके अधिकारी और कर्मचारी—सभी अपना-अपना काम करते तथा जाते-आते समय भगवान्का नाम जीभसे लेते रहें।
६. व्यापारी, सेठ-साहूकार, उद्योगपति, आढ़तिये और दलाल आदि सभी सब समय जीभसे भगवन्नाम लेते रहें।
७. गृहस्थ माँ-बहिनें चर्खा कातते समय, चक्की पीसते समय, पानी भरते समय, गो-सेवा करते समय, बच्चोंका पालन करते समय, रसोई बनाते समय, धान कूटते समय तथा घरके अन्य काम करते समय भगवान्का नाम जपती रहें।
८. पढ़ी-लिखी बहिनें साज-शृंगार बहुत करती हैं, फैशनपरस्त होती जा रही हैं, यह बहुत बुरा है; पर वे भी साज-शृंगार करते समय भगवान्का नाम जपें। अध्यापिकाएँ और शिक्षार्थिनी छात्राएँ स्कूल-कॉलेज जाते-आते समय भगवान्का नाम लें।
९. सिनेमा देखना बहुत बुरा है—पाप है, पर सिनेमा देखनेवाले रास्तेमें जाते-आते समय तथा सिनेमा देखते समय जीभसे भगवान्का नाम जपें।
१०. इसी प्रकार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र सभी नर-नारी सब समय भगवान्का नाम लें। सोनार, लोहार, कुम्हार, सुथार (बढ़ई), माली, नाई, जुलाहा, धोबी, कुर्मी, चमार, भंगी सभी भाई-बहिनें अपना-अपना काम करते हुए जीभसे भगवान्का नाम लें।
आवश्यकता समझें तो जेबमें छोटी-सी या पूरी १०८ मनियोंकी माला रखें।
सब लोग अपने-अपने घरमें, गाँवमें, मुहल्लेमें, अड़ोस-पड़ोसमें, मिलने-जुलनेवालोंमें इसका प्रचार करें। यह महान् पुण्यका परम पवित्र कार्य है। याद रखना चाहिये—भगवन्नामसे सारे पाप-ताप, दु:ख-संकट, अभाव-अभियोग मिटकर सर्वार्थसिद्धि मिल सकती है, मोक्ष तथा भगवत्प्रेमकी प्राप्ति हो सकती है।
इस महान् कार्यमें सभी लोग लगें, यह करबद्ध प्रार्थना है।