श्रीराधा

‘श्रीराधा-माधव-रस-सुधा’ के षोडशगीतोंके अध्ययन, मनन एवं नित्यपाठके प्रति परम विशुद्ध, पूर्ण त्यागमय, समर्पणमय तथा नि:स्वार्थ भगवत्प्रेमके इच्छुक भक्त, विद्वान् तथा सभी आश्रमोंके नर-नारी बहुत रुचि दिखला रहे हैं। विदेशके अनेकों विद्वानोंने इन गीतोंके भावोंकी भूरि-भूरि प्रशंसा की है। भावसम्पन्न हृदयसे इन गीतोंका प्रतिदिन नियमित पाठ करनेसे अनेकों प्रेमी साधकोंको विशेष लाभ हुआ है। अनेक स्थानोंपर भावुक भक्त इन गीतोंका रात्रिमें २ बजेसे ४.३० बजेतक गान करते हैं तथा स्थान-स्थानपर सहस्रों व्यक्ति अपनी सुविधासे इन गीतोंका नियमित पाठ करते हैं। समयकी सुविधासे पाठ करनेवाले व्यक्तियोंने तीन पद्धतियाँ अपना रखी हैं—

(१) आरम्भकी वन्दना एवं उपसंहारकी पुष्पिकाके सहित प्रतिदिन पूरे १६ गीतोंका एक या एकसे अधिक पाठ।

(२) आरम्भकी वन्दना एवं उपसंहारकी पुष्पिकासहित श्रीकृष्णके प्रेमोद‍्गारका एक गीत और श्रीराधाके प्रेमोद‍्गारका एक गीत प्रतिदिन पाठ करना। इस प्रकार ८ दिनोंमें सोलहों गीतोंका एक पूरा पाठ।

(३) प्रतिदिन एक गीतका पाठ करना। इस प्रकार वन्दना और पुष्पिकासहित सोलह गीतोंका १८ दिनोंमें पूरा एक पाठ।

जिनकी रुचि हो, वे इनमेंसे किसी पद्धतिके अनुसार पाठ कर सकते हैं।