कमजोरियाँ और बुराइयाँ दूर हो सकती हैं
प्रिय भाई! सप्रेम हरिस्मरण। आपका पत्र मिला। आपको अपनी कमजोरियाँ और बुराइयाँ दीखती हैं—यह आपका सद्गुण है। कमजोरियाँ और बुराइयाँ आत्माके धर्म नहीं हैं, ये आगन्तुक दोष हैं और भगवत्कृपाका आश्रय लेकर इन्हें दूर करनेका दृढ़ निश्चयके साथ प्रयास किया जाय तो ये अवश्य ही दूर हो सकती हैं। आप इसके लिये प्रयास कीजिये। यहाँके ‘साधक-संघ’ की नियमावली आपको भेजी जा रही है; उसके अनुसार नियमोंका पालन करना आरम्भ कर दीजिये तथा प्रतिदिन देखते रहिये—दोषोंमें कमी और सद्गुणोंमें वृद्धि हो रही है या नहीं। यहाँ रिपोर्ट भेजा कीजिये। निराश न होइये। भगवच्छरणागतिसे सारे पाप-ताप दूर हो जाते हैं।
लड़कीकी मृत्युके सम्बन्धमें आपने लिखा, सो आपको सेवा न करनेका पश्चात्ताप है; यह तो बहुत ठीक है। सेवा करनी ही चाहिये; पर आप उसकी मृत्युको बचा नहीं सकते थे। अतएव उसके लिये शोक-विषाद छोड़कर भविष्यके लिये सावधानीके साथ कर्तव्य-पालनका निश्चय कीजिये—
‘हारिये न हिम्मत बिसारिये न हरि नाम।’
शेष भगवत्कृपा।