शान्तिके लिये कर्तव्य
प्रिय महोदय! सप्रेम हरिस्मरण। आपका कृपापत्र मिला। जहाँतक बने, छोटे भाईके साथ सद्व्यवहार, प्रेमका बर्ताव कीजिये। उसके दोष न बताकर उसके गुणोंको ढूँढ़िये—(गुण भी अवश्य होंगे ही) और उसकी तारीफ कीजिये। वह नाराज भी हो तो उसको बार-बार स्नेह दीजिये। अपनी भूल स्वीकार कीजिये। धैर्य रखिये। भगवान्से उसको तथा अपनेको सद्बुद्धि प्रदान करनेके लिये प्रार्थना कीजिये।
दफ्तरमें भगवान्के सामने सदा सच्चे बने रहिये। काम जैसे लगनसे करते हैं, करते रहिये; अन्तमें सत्यकी ही जय होगी। खुशामद तो नहीं, पर यथासाध्य अपने उच्चाधिकारीसे मेल बढ़ाइये तथा भगवान्से विश्वासपूर्वक प्रार्थना करते रहिये। प्रार्थनामें अमोघ शक्ति है। शेष भगवत्कृपा।