नम्र निवेदन
प्रस्तुत पुस्तकमें हमारे श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज के द्वारा वि० सं० २०३८ में बीकानेर चातुर्मास तथा वि० सं २०३९ में जयपुर चातुर्मासके अवसरपर दिये गये कुछ सर्वोपयोगी प्रवचनोंका संग्रह किया गया है। इस साहित्यके प्रेमी पाठक-गण पूज्यवर स्वामीजीसे परिचित हैं ही। आपके सिद्धान्तों, उपदेशों तथा वचनोंसे असंख्य नर-नारी आध्यात्मिक लाभ उठा चुके हैं और उठा रहे हैं।
वर्तमान समयमें प्रस्तुत प्रवचनोंकी उपादेयता गृहस्थियों, भाइयों, बहिनों, साधकों, विद्यार्थियों अर्थात् समाजके सभी वर्गोंके लिये है। आवश्यकता केवल लाभ लेनेके निश्चयकी है। इन बातोंको पढ़ने-सुननेमात्रसे भी लाभ तो होता ही है, पर काममें लेनेसे बहुत विशेष लाभ होता है। अत: पाठकोंसे निवेदन है कि इन प्रवचनोंमें कही गयी बातोंके अनुसार जीवन बनानेकी चेष्टा करें व परम लाभ प्राप्त करें।