शीघ्र चेतो!

जल्दी दौड़ो। इस मायाके धधकते हुए दावानलसे फौरन बाहर निकलो। देखो, अग्निकी प्रलयंकरी लाल-लाल लपटें लपक-लपककर जगत‍्को धड़ाधड़ ग्रस रही हैं। प्रचण्ड धुएँसे सभी दिशाएँ छा गयी हैं। वह गया, दूसरा भी चला, अरे, तीसरेको भी लपटोंने ले लिया। परन्तु हाय! तुम मूर्खकी तरह ‘किंकर्तव्यविमूढ़’ होकर पड़े हो। अरे, अबकी तुम्हारी बारी आती है। यदि बचना चाहते हो तो तुरंत सबका मोह छोड़कर बाहर निकल पड़ो। देखो! वह देखो! उस छलकते हुए अमृतसमुद्रके किनारे विशाल जहाज ठहराये उसका कृपालु कप्तान बार-बार सीटी बजा-बजाकर सबको बुला रहा है। जिसने उसकी पुकार सुनकर उसकी ओर ध्यान दिया वह विश्वव्यापी अग्निसे बचकर दु:ख-सागरसे तुरंत तर गया। इसी तरह तुम भी तर जाओगे! अरे, निर्भय हो जाओगे—अमर हो जाओगे!! जाओ, जाओ! शीघ्रता करो, अन्यथा जलते हो, बार-बार जलोगे। चेतो! शीघ्र चेतो!!