भगवद्दर्शनके लिये तीव्र उत्कण्ठाकी आवश्यकता
सप्रेम हरिस्मरण।........आपका पत्र मिला। भगवान्के दर्शन इस कालमें भी हो सकते हैं। बहुत-से भक्त इसके प्रमाण हैं। दर्शनका उपाय केवल भगवत्कृपा है। भगवान्की कृपापर विश्वास करके जो केवल दर्शनके लिये ही तीव्र उत्कण्ठा पैदा कर लेता है, उसे भगवत्कृपासे दर्शन प्राप्त हो जाते हैं। परंतु मनकी कामनाओंकी पूर्तिके लिये भगवान्के दर्शन चाहना बुद्धिमानी नहीं है। विषयासक्ति और विषयकामना तो भगवान्के दर्शनमें विघ्नरूप हैं। इनके रहते भगवद्दर्शनकी तीव्र उत्कण्ठा प्राय: होती ही नहीं। अतएव विषयोंमें निरन्तर दु:ख-दोष देखकर उनसे मनको हटाना चाहिये।
आत्महत्या तो महापाप है। भगवद्विश्वासी पुरुष कभी आत्महत्याकी बात सोच ही नहीं सकता। आप यदि साधनामें दत्तचित्त होकर लगना चाहते हैं तो भगवान्की अहैतुकी कृपापर विश्वास करके भगवान्के नामका जप कीजिये। भगवान्के प्रेमपूर्वक लिये हुए नामसे सब कुछ सिद्ध हो सकता है। शेष भगवत्कृपा।