भगवान् विष्णु और श्रीकृष्ण एक ही हैं

प्रिय बहन! सादर हरिस्मरण। आपका कृपापत्र मिला। आप श्रीकृष्णकी उपासना करती हैं और द्वादशाक्षर मन्त्र (‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’) का जप करती हैं, इसमें कोई आपत्ति नहीं है। भगवान् श्रीविष्णु और भगवान् श्रीकृष्ण एक ही हैं। अत: आप इसी मन्त्रका जप करती रहें, छोड़नेकी कोई आवश्यकता नहीं है।

प्राणायामसम्बन्धी लेख पढ़कर प्राणायाम आपको नहीं करना चाहिये। प्राणायामकी क्रिया ठीक न होनेपर तरह-तरहके रोग हो जाते हैं, जिनका मिटना बहुत कठिन होता है। अनुभवी योगीकी संनिधिमें रहकर ही योगाभ्यास करना उचित होता है। ऐसे अनुभवी योगी प्रथम तो मिलने कठिन हैं; और यदि कोई ऐसे माने भी जायँ तो स्त्रीका किसी भी परपुरुषकी संनिधिमें रहना सर्वथा अधर्म है तथा महान् हानिकारक होनेसे वर्जित है।

इस युगमें सर्वोत्तम साधन है—भगवान‍्के नामका जप। मैं तो आपसे अनुरोध करता हूँ, आप भगवन्नामजपका अभ्यास करें। यह सर्वथा निरापद है और ऊँचे-से-ऊँचा फल देनेवाला है। शेष भगवत्कृपा।