भगवान‍्से प्रार्थना कीजिये

सादर हरिस्मरण। पत्र मिला। किसी विवाहके अवसरपर आपके साथ बलपूर्वक दुराचार किया गया, यह बड़े खेदकी बात है। इससे पुरुषसमाजका घोर पतन प्रत्यक्ष हो जाता है। आपका इस पापसे दु:खी होना उचित ही है। आप इस पापका प्रायश्चित्त करना चाहती हैं, इसके उपाय हैं—महान् पश्चात्ताप तथा फिर कभी ऐसा न हो इसके लिये प्राणपणसे घोर प्रतिज्ञा। ‘राम’ नामकी सौ मालाका एक वर्षतक प्रतिदिन जप करना और भगवान‍्से कातर प्रार्थना करना।

पतिदेवके नाराज होने और भविष्यमें व्यवहार बिगड़नेकी आशंका बिलकुल न हो, तब तो उनसे सब बातें बतला दीजिये। पर ऐसी बात होनी है बहुत ही कठिन। नहीं तो भगवान‍्से अपने अपराधके लिये रोकर क्षमा माँगिये और इस चीजको किसीपर कभी प्रकट मत कीजिये। बच्चा आपका है, वह आपके पतिका ही है। भगवान‍्के भजनका प्रयत्न कीजिये और भगवान‍्से कातर प्रार्थना कीजिये। वस्तुत: परपुरुषसे परस्त्रीका और परस्त्रीसे परपुरुषका एकान्तमें मिलना ही महान् अनर्थका कारण होता है। इससे सदा बचना चाहिये।