प्रणवके संयोगसे लाभ
प्रिय महोदय। सादर सप्रेम हरिस्मरण। कृपापत्र मिला, धन्यवाद। आपके पूज्य गुरुजीका यह कथन कि ‘रां रामाय नम:’ इस षडक्षर मन्त्रमें ‘ॐ’ लगानेकी आवश्यकता नहीं है, ‘रां’ ही उसमें प्रणवका कार्य करता है, बिलकुल ठीक है। मन्त्रका स्वरूप तो उतना ही है। फिर भी यदि कोई ‘ॐ’ लगाये तो दोष नहीं है। ‘ॐ’ भगवान्का पवित्र नाम है, उसे मन्त्रके आरम्भमें जोड़कर जप करनेसे मन्त्रकी शक्ति बढ़ती ही है। यही बात ‘नवार्णमन्त्र’ के सम्बन्धमें समझनी चाहिये। ‘नवार्ण’ में ‘ऐं, ह्रीं, क्लीं’—ये तीन ही बीज हैं। नवार्ण या नवाक्षर मन्त्र—‘ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ बिना ‘ॐ’ के ही है, तथापि ‘ॐ’ लगाकर जपनेका शिष्टाचार सर्वत्र देखा जाता है और उसमें साद्गुण्यका ही आधान होता है। आप अपने गुरुजीके आज्ञानुसार बिना ‘ॐ’ के ही दोनों मन्त्रोंका जप कर सकते हैं। पर जो लोग ‘ॐ’ लगाकर जप करते हैं, वे भी ठीक ही करते हैं, यों मानना चाहिये। शेष भगवत्कृपा।